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वीडियो कॉल से हनीट्रैप का शिकार हुआ रविंद्र: पाकिस्तानी महिला ने ISRO अफसर बनकर फंसाया, गगनयान से जुड़े सीक्रेट डॉक्यूमेंट लीक
परिचय
भारत की सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों की चोरी और लीक होने के मामलों में एक नया मामला सामने आया है। इसरो (ISRO) के गगनयान मिशन से जुड़े गोपनीय दस्तावेज एक हनीट्रैप के जरिए लीक कर दिए गए। एक पाकिस्तानी महिला जासूस ने खुद को इसरो अधिकारी बताकर वीडियो कॉल और अन्य माध्यमों से भारतीय नागरिक रविंद्र को अपने जाल में फंसा लिया।
कैसे हुआ हनीट्रैप का शिकार?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, रविंद्र को एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक महिला से संपर्क हुआ, जिसने खुद को इसरो में कार्यरत अधिकारी बताया। दोनों के बीच चैटिंग शुरू हुई और बाद में वीडियो कॉल के जरिए बातचीत होने लगी। महिला ने धीरे-धीरे विश्वास जीतकर महत्वपूर्ण जानकारी हासिल करनी शुरू कर दी।
महिला ने खुद को इसरो के गगनयान मिशन से जुड़ा अधिकारी बताया और उससे गोपनीय दस्तावेज साझा करने की मांग की। धीरे-धीरे, वह रविंद्र को ब्लैकमेल करने लगी और महत्वपूर्ण सूचनाएं निकालने में सफल रही।
गगनयान मिशन और लीक हुई जानकारी
गगनयान मिशन भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन है, जिसमें भारतीय वैज्ञानिक और इंजीनियर पूरी मेहनत से काम कर रहे हैं। मिशन से संबंधित गोपनीय जानकारी लीक होने से देश की सुरक्षा को खतरा हो सकता है। लीक हुई जानकारी में संभावित लॉन्च योजनाएं, तकनीकी डिजाइन, परीक्षण प्रक्रिया और अन्य संवेदनशील डेटा शामिल हो सकते हैं।
जांच एजेंसियों की प्रतिक्रिया
इस मामले की जानकारी मिलते ही भारतीय खुफिया एजेंसियों और साइबर सेल ने जांच शुरू कर दी। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि महिला का कनेक्शन पाकिस्तान से है और यह पूरी घटना एक बड़े साइबर-जासूसी नेटवर्क का हिस्सा हो सकती है।
हनीट्रैप से कैसे बचें?
आजकल हनीट्रैप के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, खासकर उन लोगों को टारगेट किया जाता है जो सुरक्षा या गोपनीय दस्तावेजों से जुड़े होते हैं। इससे बचने के लिए कुछ महत्वपूर्ण सावधानियां अपनाई जा सकती हैं:
- अनजान लोगों से ऑनलाइन बातचीत करने से बचें।
- सोशल मीडिया पर अपनी निजी और पेशेवर जानकारी साझा करने से पहले सतर्क रहें।
- वीडियो कॉल या चैटिंग के दौरान संवेदनशील जानकारी साझा न करें।
- अगर किसी अज्ञात व्यक्ति से संदिग्ध अनुरोध मिले, तो तुरंत साइबर क्राइम सेल को सूचित करें।
निष्कर्ष
रविंद्र का हनीट्रैप का शिकार होना भारत की साइबर सुरक्षा के लिए एक चेतावनी है। यह घटना दर्शाती है कि कैसे विदेशी जासूस डिजिटल माध्यमों से भारतीय नागरिकों को फंसाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे मामलों से बचने के लिए सतर्कता और डिजिटल जागरूकता बेहद जरूरी है।
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